<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">
  <title>DSpace Community:</title>
  <link rel="alternate" href="https://ir.vidyasagar.ac.in/jspui/handle/123456789/6317" />
  <subtitle />
  <id>https://ir.vidyasagar.ac.in/jspui/handle/123456789/6317</id>
  <updated>2026-04-30T13:21:15Z</updated>
  <dc:date>2026-04-30T13:21:15Z</dc:date>
  <entry>
    <title>SANJEEV  KE  KATHA-SAHITYA KA SAMAJSHASTRIYA  ANUSHILAN</title>
    <link rel="alternate" href="https://ir.vidyasagar.ac.in/jspui/handle/123456789/6336" />
    <author>
      <name>Rabidas, Om Prakash</name>
    </author>
    <id>https://ir.vidyasagar.ac.in/jspui/handle/123456789/6336</id>
    <updated>2022-01-06T07:19:21Z</updated>
    <published>2021-12-10T00:00:00Z</published>
    <summary type="text">Title: SANJEEV  KE  KATHA-SAHITYA KA SAMAJSHASTRIYA  ANUSHILAN
Authors: Rabidas, Om Prakash</summary>
    <dc:date>2021-12-10T00:00:00Z</dc:date>
  </entry>
  <entry>
    <title>Mahadevi Verma Aur Rabindranath Thakur Ki Rahasyavadi Kavitaon Ka Tulnatmak Adhyayan</title>
    <link rel="alternate" href="https://ir.vidyasagar.ac.in/jspui/handle/123456789/6320" />
    <author>
      <name>Singh, Anju</name>
    </author>
    <id>https://ir.vidyasagar.ac.in/jspui/handle/123456789/6320</id>
    <updated>2021-12-13T07:26:53Z</updated>
    <published>2021-11-13T00:00:00Z</published>
    <summary type="text">Title: Mahadevi Verma Aur Rabindranath Thakur Ki Rahasyavadi Kavitaon Ka Tulnatmak Adhyayan
Authors: Singh, Anju
Abstract: तु त शोध - बं ध को अययन और ववे चन क सु वधा के  िलए भू िमका और&#xD;
उपसं हार के  अितर छह अयाय म  वभाजत कया गया ह , जो इस कार है  -  &#xD;
थम अयाय - “रहयवाद : वप और वकास - हं द काय के  सदभ  मे ” शीषक&#xD;
के  अंतगत परभाषाओं  के  आलोक म  रहय और रहयवाद म  अंतर प करते  ह&#xD;
के  वप और वकास पर चचा क गई ह । हं द साहय म  रहयवाद क परपरा  का&#xD;
ववे चन वे षण के  साथ नय रहयवाद पर भी काश डाला गया है ।  &#xD;
तीय अयाय - “महादे वी वमा और रवीनाथ ठाकु र क रहयवाद कवताएँ  - एक&#xD;
परचय” शीषक के  अंतगत कवियी महादे वी और कवगु  रवीनाथ के  पारवारक, िशा-&#xD;
दा, पे शा और सामजक परवे श पर चचा क गई है । इस सदभ म  महादे वी एवं  रवीनाथ&#xD;
के  उस परवे श का वे षण अपे त है , जसने  इन दोन के  भीतर के  रचनाकार का िनमाण&#xD;
कया। इसके  उपरां त इन दोन के  रहयवाद काय का ववे चन - वे षण करते  ह&#xD;
ु&#xD;
ए वश&#xD;
चचा क गई ह ।  &#xD;
तृतीय अयाय - “कृ ित सबधी रहयवाद - महादे वी वमा एवं  रवीनाथ ठाकु र&#xD;
क कवताएँ” शीषक के  अंतगत  महादे वी और रवीनाथ क रहयवाद कवताओं  म  कृ ित&#xD;
का आलं बन प, उपन प, मानवीय प के  साथ - साथ कृ ित सबधी रहयवाद काय&#xD;
पर प चचा कया गया है ।  &#xD;
चतु थ अयाय - “भावामक रहयवाद - महादे वी वमा एवं  रवीनाथ ठाकु र क&#xD;
कवताएँ” शीषक के  अंतगत महादे वी और रवीनाथ क भावामक रहयवाद कवताओं  म &#xD;
अलौकक णय भाव, कणा, वे दना और द&#xD;
ु&#xD;
खवाद पर ववे चन - वे षण के  साथ दोन के &#xD;
भावामक रहयवाद कवताओं  का लोक कयाणकार प पर भी चचा क गई ह  | &#xD;
पं चम अयाय - “धम, दशन एवं  साधना सबधी रहयवाद - महादे वी वमा एवं &#xD;
रवीनाथ ठाकु र क कवताएँ” शीषक के  अंतगत धम, दशन और साधना सं बं धी अथ और &#xD;
परभाषा प करते  ह&#xD;
ु&#xD;
ए, दोन के  रहयवाद कवताओं  म  धम, दशन, साधना सं बं धी प पर&#xD;
वश चचा क गई है  और  दोन के  बीच साय वै षय प कया गया है ।      &#xD;
ु&#xD;
ए रहयवाद छठा अयाय - “भाषक अिभयं जना - महादे वी वमा एवं  रवीनाथ ठाकु र क&#xD;
रहयवाद कवताएँ ” शीषक के  अंतगत, महादे वी और रवीनाथ के  रहयवाद कवताओं  को &#xD;
आधार बनाकर उनके  काय म  छं द, अलं कर, शद िच, तीक, पक, बब पर चचा क गई&#xD;
ह ।  &#xD;
इस कार महादे वी वमा और रवीनाथ ठाकु र क रहयवाद कवताओं  का&#xD;
तु लनामक अययन के  बाद उपसं हार तु त कर, अंत म  सदभ थ सू ची द गई है ।</summary>
    <dc:date>2021-11-13T00:00:00Z</dc:date>
  </entry>
</feed>

